Jab mulaqaat ho to aisi ho

पूछते हो कि शाम कैसी हो
दिल को बहलाती याद की सी हो

आँख भर देख लूँ मैं आज उसे
क्या पता कल की सुबह कैसी हो

प्यार करना अगरचे जुर्म हुआ
फिर सज़ा उस की चाहे जैसी हो

देख कर उस को मैं ने सोचा था
ज़िंदगी हो तो काश ऐसी हो

धूप में प्यार भी गया था झुलस
दोपहर अब कभी न वैसी हो

जिस की बातें फ़साना होती थीं
ज़िंदगी उस की जाने कैसी हो

उस का होना भी क्या ज़रूरी है
चाँदनी रात हो, उदासी हो

– स्वाति सानी “रेशम”

پوچھتے ہو کہ شام کیسی ہو
دل کو بہلاتی یاد کی سی ہو

آنکھ بھر دیکھ لوں میں آج اسے
کیا پتہ کل کی صبح کیسی کو

پیار کرنا اگر چہ جرم ہوا
پھر سزا اس کی چاہے جیسی ہو

دیکھ کر اس کو میں نے سوچا تھا
زندگی ہو تو کاش ایسی ہو

دھوپ میں پیار بھی گیا تھا جھلس
دو پہر اب کھبی نہ ویسی ہو

جس کی باتیں فسانہ ہوتی تھیں
زندگی اس کی جانے کیسی ہو

اس کا ہونا بھی کیا ضروری ہے
چاندنی رات ہو اداسی ہو

سواتی ثانی ریشمؔ –

Kahi jo baat wo sach thii

कही जो बात वो सच थी मगर मानी नहीं जाती मिरे छोटे से दिल की ये परेशानी नहीं जाती वो बेटा है मैं बेटी हूँ यही एक फ़र्क़ है हम में मिरी क़िस्मत में है पिंजरा वाँ शैतानी नहीं जाती किसी के आँख का पानी किसी के दिल की वीरानी अगर परदे के पीछे हो … Continue reading Kahi jo baat wo sach thii

Wo be-wafa bhii ho to kya

वो बेवफ़ा भी हो तो क्या ये ऐसी भी खता नहीं ये ज़िंदगी भी चार दिन में देगी क्या दग़ा नहीं? ज़बान पे सवाल थे प लब मिरे सिले रहे वो मुंतज़िर खड़ा रहा प मैं ने कुछ कहा नहीं वो राह अपनी चल पड़ा न मुड़ के देखा उस ने फिर मैं बुत बनी … Continue reading Wo be-wafa bhii ho to kya

फ़ना (فنا)

तुम्हारी चाहत पहाड़ पर मुंजमिद बर्फ की मानिंद मेरी गर्म हथेली के लम्स से पिघलती हुई मेरे हाथों से निकल कर पहाड़ों, जंगलों, और रास्तों को पार करती हुई तेज़ी से बहने लगती है मगर सूरज की तपिश से बच नहीं पाती और धीरे धीरे ये पिघलती, बहती चाहत तुम्हारी भाप बन कर फ़ना हो … Continue reading फ़ना (فنا)

Jaagi ratoN ka ai’tbaar kahan

जागी रातों का ए’तबार कहाँमुझ को ख़्वाबों पे इख़्तियार कहाँ नींद बिस्तर पे जागी रहती हैदिल का जाने गया क़रार कहाँ रक़्स परवाने का है नज़रों में शम’अ का कोई राज़ दार कहाँ बनते बनते बनेगी बात कभी अभी उस को है मुझ से प्यार कहाँ मुस्कुराहट बिखेर दो तुम तो ग़म भी होता है … Continue reading Jaagi ratoN ka ai’tbaar kahan

Meri pyaas ko samjho tum… dariya mere andar hai

मेरी प्यास को समझो तुम दरिया मेरे अंदर है कितने ज़ख्मों को सींचूँ मैं जिस्म का पैकर जर्जर है यादें मेरे माज़ी की बौछारों का नश्तर है सहरा सहरा चीख उठा है गुलशन गुलशन बंजर है साहिल तन्हा बैठा है प्यास भी एक समंदर है एक तबस्सुम होंटों पर अपनी रूह का ज़ेवर है जब … Continue reading Meri pyaas ko samjho tum… dariya mere andar hai

Kuch aur aasmaN par ham taank deN sitare

सूरज की रोशनी में बिखरे हुए थे सारे जो रात की सियाही में साथ थे हमारे आओ फ़रोंजां कर दें आँसू के कुछ शरारेकुछ और आसमां पर हम टाँक दें सितारे मिलने का वा’दा कर के फिर चाँद क्यूँ न आया नद्दी थी राह तकती गिन गिन के रात तारे करवट बदलते दुख की वहशत … Continue reading Kuch aur aasmaN par ham taank deN sitare

Abr jab wadiyoN pe chhaye thae

अब्र जब वादियों पे छाये थे चाँद पर खामुशी के साये थे सहमी सहमी सियाह रातों के दीप आंधी में थरथराये थे तन्हा रातों में भीगते नग़्मेअब के बारिश ने गुनगुनाये थे इस चमन के थे जितने क़िस्से वो काँटों ने कलियों को सुनाये थे जाने पहचाने चेहरे थे मौजूद सर झुकाये, नज़र चुराये थे … Continue reading Abr jab wadiyoN pe chhaye thae

Dil to fariyaad kiya karta hai

दिल तो फ़रियाद किया करता हैज़ीस्त फ़रमान सुना देती है शाख से फूल गिरा कर के हवातेरे आने का पता देती है गुल को दो बूंद पिला कर शबनमप्यास सहरा की बुझा देती है गुनगुनाती हुई इक याद तिरीबुझते शोलों को हवा देती है प्यार है सीप का मोती जिस कोरेत साहिल की दुआ देती … Continue reading Dil to fariyaad kiya karta hai

Eid aur Diwali عید اور دیوالی

پہن کے چنری رنگوں والی شام مسکرا اٹھیپلک جھپکتے دن گیا او رات جگمگا اٹھیسواتی ثانی ریشمؔ – पहन के चुनरी रंगों वली शाम मुस्कुरा उठी पलक झपकते दिन गया औ रात जगमगा उठी -स्वाति सानी “रेशम” Photo by Siti Rahmanah Mat Daud on Unsplash