Skip to content


अश्क

गमों की रहगुज़र पर जब अश्कों ने भी साथ न दिया
तो हम चल पडे अकेले ही मंज़िल की तलाश में
आंख की कोर पर बूंद मानों लटक कर रह गयी
और धीरे धीरे हालात की आंधी ने उसे भी सोख लिया

Posted in Hindi poems, Prose n' Poetry.

Tagged with .


2 Responses

Stay in touch with the conversation, subscribe to the RSS feed for comments on this post.

  1. mohammad yunus says

    आँखों के मोतियों को जिस खूबी से आपने कविता की माला में पिरोया हे वो वाकेई तारीफ के काबिल हे

  2. swatisani says

    शुक्रिया.



Some HTML is OK

or, reply to this post via trackback.



Geo Visitors Map