होली का चाँद

आज शाम मैंने जो देखा छैल छबीला चाँद
तुमने भी तो देखा होगा इस होली का चाँद

झाँक झाँक कर ताक ताक कर बुला रहा वो
मुझको क्यों कर सता रहा  चमकीला चाँद

रंग लगा के लाल गुलाबी आया था छत पर
नील गगन में रहने वाला वही नशीला चाँद

बुला रहा था पिछवाडे से चुपके चुपके
था वो मेरा दिलबर एक सजीला चाँद

दबे पाँव आया था वो कुछ कहने मुझसे
बैठ गयी मैं देहरी पर देख रंगीला चाँद

मैंने भी तो घंटो कर ली बातें उससे
तुमको भी तो सुनता होगा एक अकेला चाँद

मैं ना कहती थी याद तुम्हें मैं आऊंगी
जब देखोगे आँगन में एक हठीला चाँद

– स्वाति सानी ‘रेशम’

2 thoughts on “होली का चाँद”

  1. nice….

    chand aur huzum (collection of stars),
    barati mein bin bulaye suraj mehmaan…
    ek raat is se aage bhi koi baat chale…..

    some stray thoughts that cannot be parked…

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.