c'est la vie
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गमों की रहगुज़र पर जब अश्कों ने भी साथ न दिया तो हम चल पडे अकेले ही मंज़िल की तलाश में आंख की कोर पर बूंद मानों लटक कर रह गयी और धीरे धीरे हालात की आंधी ने उसे भी सोख लिया
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