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main swati tum chatak

I wrote this sometime in 1986

All of 18, I was envisioning a future – a dream that I wanted to live.

A dream that came true for me

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मैं ज्योति, तुम उजियारा
मैं नभ प्रतीक, तुम सूरज हो
मैं सौरभ, तुम हो सुवास
मैं हूँ प्रार्थना, तुम बने शिवि
मैं प्रकृित निश्चछल, तुम उज्जवल मानव
मैं पूर्ण, तुम हो संपूर्ण
मैं सरिता कलकल, तुम सागर सम
बहती बहती पवन हूँ मैं, तुम मंद हवा का झोंका हो
मैं गति, तुम हो ठहराव
मैं हूँ नभ, तुम ब्रम्हांड हो
मैं प्रेरणा, तुम कल्पना
मैं बूंद बनी प्यासे तुम
मैं स्वाति, तुम चातक

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Posted in My Hindustani poems, Prose n Poetry.



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